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Wednesday, 6 September 2017

बहे हिमाचल की हवा की ओर

शनिवार का दिन था, दिनभर की उधेडबुन से जैसे ही फुरसत मिला, शाम तकरीबन 0400 बजे रहे होंगे, बारिश के आसार भी लग रहे थे और हिमाचल से निकल रही हवा बदन की गर्मी से निजात व आनंद दे रही थी, वर्तमान अकल्पनीय है ।

एकाएक अंकित कुमार का फ़ोन आया, भैया आज का वीकली ऑफ डे बिस्तर पर पड़े पड़े गुजर गया ।कही घूमने चला जाये,  मैने भी रिप्लाई देने में देर नही की, तपाक से एक डिमांड रख दिया ।

।।जुलु बार की पार्टी देनी पड़ेगी ।।

जुलु बार एक  Ice cream का नाम है जो गुजरात का प्रोडक्ट है, स्पेशल डिमांड से लाता था और जब भी आपस मे कोई पार्टी की बात करता तो ICE CREAM का ही डिमांड होता था ।

बता दु की उस समय मेरी पोस्टिंग पंजाब के जिला रूपनगर  भाखड़ा नागल डैम पोस्टिंग था । अगर नांगल की बात करूं तो वहाँ की खूबसूरती अब तक कि लाइफ में शायद ही दिखा होगा क्योंकि प्रकृति की सारी खूबसूरती वहाँ मौजूद है ।
1.  18 KM की दूरी पर आनंदपुर साहिब जहाँ से सिख धर्म की स्थापना हुई थी और विश्व का 8 वॉ अजूबा बना है ।
2. 21 KM की दूरी पर माँ नैना देवी मंदिर जहाँ      आदिशक्ति माँ का आँख गिरा था ।
3. भाखड़ा नागल डैम महज 3 KM पर है, जो सतलज नदी पर बना है और अकेले 4 राज्यो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को सिंचाई का पानी देता है ।
4 . बाबा बालक नाथ का मंदिर  करीब 40 KM जो भगवान शिव शंकर का रूप है
5. आदि शक्ति ज्वाला माँ और चिंतपूर्णी माँ का मंदिर लगभग क्रमशः  40 KM और 48 KM की दूरी पर स्थित है ।

अभी नई HONDA ACTIVA स्कूटी को खरीदे हुए तीन दिन ही हुए थे और अंकित को अच्छी तरह चलाने भी नही आता था एवज से थोड़ा ज्यादा ही घूमने को लालायित था इसलिये बोला... कोई बात नही,तैयार हूं ।

फिर क्या था निकल पड़े .... नांगल से अजौली मोड़ से होते हुए ऊना हिमाचल की तरफ ..........

जब हम लोग ऊना पार कर लिए तो अंकित दूरी को सीमित नही करना चाहता था बोला आगे चलते है कहाँ क्या क्या है  

जिंदगी है एक सफर सुहाना , कल क्या होगा किसने जाना ।

अब हमलोग बाबा बालकनाथ रोड़ की तरफ निकल रहे थे , करीब15 KM की दूरी पर गए होंगे... झरने का दृश्य देखकर कुछ देर रुकना चाहे पर वहाँ कुछ लड़कियाँ पानी भरने के लिए घड़ा लेकर आ गई । सामने पहाड़ो का खूबसूरत नजारा था , दूर दूर तक केवल लाल बलुआ रंग के पहाड़ ही दिख रहे थे जिनमें उभरे दरारों को देखकर फ़ोटो लेने से खुद को नही रोक पाए । हालांकि यह हमलोगों का आखिरी पड़ाव नही था ।

रास्ते मे पहाड़ो का नजारा ।

आगे अंकित के अनुरोध करने पर उसे गाड़ी चलाने को दिया आगे रास्ता बिल्कुल बराबर था आगे 5 km गए होंगे कि सामने होटल दिखाई दिया, वहाँ से कोल्डड्रिंक और कुरकुरे लेकर निकल पड़े ....आगे 2 km की दूरी जाने के बाद पहाड़ो की चोटियों में काट काट कर बनाये गए रास्ते सिंगल रास्ते पर गाड़ी चलाना में डर तो लग रहा था परंतु मजा  आ रहा था जब 100 मीटर की चढ़ाई के बाद करीब 150 मीटर की दूरी ढलान में खुद स्पीड से चल रही थी ।

हिमाचल की खूबसूरती से रुबरु कराते हुए । वाकई दिलचस्प नजारा था ।

इस तरह करते हुए शाम के 7 00 बजे चुके थे।अब हमलोग देर हो चुके थे हालांकि सूर्यास्त होते होते हम ऊना पहुँच वापिस आ चुके थे । आकर ऊना समोसे और लस्सी का नास्ता किये और गाड़ी चलाने की कमान अंकित दिया ।

जैसे ही हम नांगल के अजौली मोड़ आये ,मुझे तो नही पर अंकित को किया हुआ वादा याद था । जुलु बार आइस क्रीम खाये और बाजार कर वापिस आ गए ।

दोस्तों जिंदगी में जो पल मित्रों के साथ बिताने को आये खुशी खुशी बिता लेना क्योंकि वही बीते कल में बदल जायेंगे, वैसे भी तो हम बचपन से अबतक बहुत दोस्त बनाये पर अब तक साथ किसका ???????

।। आभार ।।